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जनता का मुद्दा- लाखों खर्च के बाद भी लूणदा में जल संकट, रोटेशन से मिल रही पानी की सप्लाई

जल जीवन मिशन योजना पर खर्च हुई राशि के बावजूद ग्रामीणों को नहीं मिली राहत, कभी एक दिन छोड़कर तो कभी अनियमित समय पर होती है जलापूर्ति

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Yuvraj Pachori

Journalist

October 9, 2026

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जनता का मुद्दा- लाखों खर्च के बाद भी लूणदा में जल संकट, रोटेशन से मिल रही पानी की सप्लाई

लूणदा। बिजली, पानी और सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी मूलभूत सुविधाएं हैं। इन सुविधाओं की उपलब्धता ही किसी क्षेत्र के विकास की गति तय करती है। यदि ग्रामीणों को समय पर पर्याप्त पानी, नियमित बिजली और सुगम सड़कें उपलब्ध नहीं हों, तो विकास की योजनाओं का वास्तविक लाभ आमजन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इन समस्याओं का समय रहते निराकरण करना आवश्यक है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को गति मिल सके और लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

लूणदा कस्बे में इन दिनों जलापूर्ति की समस्या ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। घर-घर नल से पानी पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार ने जल जीवन मिशन योजना के तहत लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन इसके बावजूद कस्बे के लोगों को नियमित जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालात यह हैं कि योजना लागू होने के बाद जलापूर्ति की व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक अनियमित हो गई है। ग्रामीणों को एक दिन छोड़कर एक दिन पानी मिल रहा है, वहीं नलों में पानी आने का समय भी निर्धारित नहीं है। ऐसे में लोगों को अपनी दिनचर्या पानी की सप्लाई के अनुसार तय करनी पड़ रही है।

पहले प्रतिदिन मिलता था पानी, अब रोटेशन से हो रही सप्लाई

जल जीवन मिशन योजना लागू होने से पहले लूणदा कस्बे में ग्राम पंचायत की जनता जल योजना के माध्यम से प्रत्येक मोहल्ले में प्रतिदिन घरों तक पानी पहुंचाया जाता था। इस व्यवस्था के तहत ग्रामीणों को नियमित रूप से जलापूर्ति मिलती थी और दैनिक जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता बनी रहती थी।

इसके बाद जल जीवन मिशन योजना के तहत नई व्यवस्था विकसित की गई तथा पानी की टंकी का निर्माण करवाया गया। उम्मीद थी कि इस योजना के लागू होने से घर-घर नल कनेक्शन के माध्यम से पर्याप्त और नियमित पानी मिलेगा। लेकिन योजना लागू होने के बाद जलापूर्ति की व्यवस्था रोटेशन पर आ गई। अब कई मोहल्लों में एक दिन छोड़कर एक दिन पानी की सप्लाई की जा रही है।

इतना ही नहीं, पानी की सप्लाई का कोई निश्चित समय भी निर्धारित नहीं है। थ्री-फेज बिजली आपूर्ति के समय में बदलाव होने से जलापूर्ति का समय भी प्रभावित होता है। इसके चलते लोगों को यह पता नहीं रहता कि नलों में पानी कब आएगा। कई बार घरेलू कामकाज के दौरान पानी की जरूरत पड़ने पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नियमित जलापूर्ति के अभाव में ग्रामीणों को पानी का संग्रह करके रखना पड़ता है, ताकि अगले दिन जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके।

पुरानी ट्यूबवेल के भरोसे जलापूर्ति, नई ट्यूबवेल नहीं आई काम

गौरतलब है कि जल जीवन मिशन योजना के तहत जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभाग की ओर से नई ट्यूबवेल खुदवाई गई थी। हालांकि, इस ट्यूबवेल के पानी की गुणवत्ता पीने योग्य नहीं होने के कारण उसका उपयोग पेयजल आपूर्ति के लिए नहीं किया जा सका। इसके बाद विभाग ने पुरानी ट्यूबवेल के माध्यम से ही जलापूर्ति जारी रखी, जिसका उपयोग पहले जनता जल योजना के दौरान किया जाता था।

नई योजना लागू होने के बावजूद पुरानी जलस्रोत व्यवस्था पर निर्भरता बनी रहने से जलापूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। जब पानी की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ा, तो ग्रामीणों को उम्मीद थी कि विभाग की ओर से अतिरिक्त जलस्रोत विकसित किए जाएंगे और नियमित सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत ने भी अपने स्तर पर एक अन्य ट्यूबवेल खुदवाया, लेकिन इसके बावजूद जलापूर्ति व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। वर्तमान में भी ग्रामीणों को रोटेशन के आधार पर पानी मिल रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि लोगों को पर्याप्त और नियमित पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो योजना का वास्तविक लाभ आखिर कब मिलेगा?

पानी की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना बढ़ा दिया योजना का दायरा

पूर्व में जनता जल योजना के माध्यम से मुख्य रूप से लूणदा कस्बे में जलापूर्ति की जाती थी। वहीं, जल जीवन मिशन योजना लागू होने के बाद इसका दायरा बढ़ाकर आसपास की दो-तीन बस्तियों को भी इससे जोड़ दिया गया, ताकि वहां रहने वाले लोगों को भी नल के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल सुविधा पहुंचाना निश्चित रूप से एक आवश्यक कदम है, लेकिन इसके लिए पानी की उपलब्धता, जलस्रोतों की क्षमता और बढ़ती मांग के अनुरूप पर्याप्त व्यवस्था करना भी उतना ही जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना का दायरा बढ़ाते समय जलस्रोतों की क्षमता के अनुरूप ठोस इंतजाम नहीं किए गए। पुरानी ट्यूबवेल के सहारे ही बढ़े हुए क्षेत्र में जलापूर्ति शुरू कर दी गई, जिससे पानी की मांग और उपलब्धता के बीच असंतुलन पैदा हो गया।

ऐसे में योजना से जुड़े कार्यों की समीक्षा कर यह पता लगाना जरूरी है कि वर्तमान में कितने परिवारों को जलापूर्ति की जा रही है, उपलब्ध जलस्रोतों से कितनी मात्रा में पानी मिल रहा है और नियमित सप्लाई के लिए कितनी अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता है। यदि इन बिंदुओं पर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो जलापूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान निकालने में मदद मिल सकती है।

ट्यूबवेल बढ़ें, नियमित जलापूर्ति की दरकार

लूणदा में जलापूर्ति की समस्या को देखते हुए अब ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस समस्या का स्थायी समाधान कैसे होगा। पूर्व में जनता जल योजना के माध्यम से जिस प्रकार प्रत्येक मोहल्ले में प्रतिदिन पानी पहुंचता था, उसी प्रकार नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग को प्रभावी योजना बनानी चाहिए। इसके लिए क्षेत्र में पानी की उपलब्धता और वास्तविक मांग का आकलन करके आवश्यकता के अनुसार नए ट्यूबवेल खुदवाने, मौजूदा जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने अथवा अतिरिक्त पानी की टंकी का निर्माण करवाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। साथ ही, जलापूर्ति की समय-सारणी निर्धारित करने और बिजली आपूर्ति में बदलाव के बावजूद पानी वितरण की व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है।

यदि आसपास की बस्तियों को भी नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराना है, तो उनके लिए पर्याप्त जलस्रोत और भंडारण क्षमता विकसित करना आवश्यक होगा। केवल नल कनेक्शन उपलब्ध करवा देने से योजना का उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक घर तक पर्याप्त मात्रा में नियमित पानी पहुंचना भी सुनिश्चित करना होगा।

ग्रामीणों को राहत का इंतजार

लूणदा में जल जीवन मिशन योजना के तहत हुए कार्यों के बावजूद जलापूर्ति की समस्या बने रहना व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि नई योजना से पानी की समस्या दूर होगी और उन्हें पहले से बेहतर सुविधा मिलेगी, लेकिन वर्तमान स्थिति में लोगों को अब भी रोटेशन के आधार पर पानी मिलने से संतोष करना पड़ रहा है।

ऐसे में संबंधित विभाग को जलस्रोतों की स्थिति, ट्यूबवेल की उपयोगिता, पानी की टंकी की क्षमता और बढ़े हुए क्षेत्र की जरूरतों का आकलन कर आवश्यक कदम उठाने चाहिए। साथ ही, ग्रामीणों को पानी की सप्लाई का निश्चित समय बताकर व्यवस्था में पारदर्शिता लानी चाहिए।

अब देखना यह है कि संबंधित विभाग लूणदा की जलापूर्ति समस्या के समाधान के लिए कब ठोस कदम उठाता है और ग्रामीणों को नियमित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में कब तक प्रभावी व्यवस्था लागू होती है।

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