लूणदा। पंचायतीराज चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच लूणदा ग्राम पंचायत की तुलना में अमरपुरा जागीर गांव में विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं को लेकर अलग ही तस्वीर सामने आ रही है। सीटों के आरक्षण और चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद से अमरपुरा जागीर में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 10 से 15 पनघटों की व्यवस्था तथा हाईमास्ट लाइटें लगवाए जाने की चर्चा है। इन व्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
गर्मी हो या
सामान्य दिनचर्या, ग्रामीण इलाकों में पेयजल की उपलब्धता
आमजन के लिए सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। ऐसे में गांव में पनघटों की
स्थापना से लोगों को पानी भरने में सुविधा मिल सकती है और पेयजल के लिए दूर तक
जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है। वहीं, हाईमास्ट लाइटें लगने से प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक
स्थानों पर रात के समय रोशनी की व्यवस्था बेहतर हो सकती है। इन सुविधाओं का लाभ
सीधे ग्रामीणों को मिलेगा।
अमरपुरा में सुविधाओं को लेकर सक्रियता, लूणदा में इंतजार
चुनावी माहौल के
बीच अमरपुरा जागीर में पेयजल और रोशनी जैसी सुविधाओं को लेकर दिखाई दे रही
सक्रियता की तुलना अब लूणदा से भी की जाने लगी है। ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ
रहा है कि जब आसपास के गांवों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं, तो लूणदा में इस दिशा में ठोस पहल क्यों
नजर नहीं आ रही है। लूणदा ग्राम
पंचायत की स्थिति पर नजर डालें तो यहां अब तक न तो प्रमुख स्थानों पर हाईमास्ट
लाइटें लगने की व्यवस्था दिखाई दे रही है और न ही पेयजल सुविधा को लेकर ऐसी कोई
विशेष पहल सामने आई है, जिसकी चर्चा ग्रामीणों के बीच हो। ऐसे
में स्थानीय लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लूणदा की मूलभूत
जरूरतों को लेकर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और नेताओं का ध्यान कब जाएगा।
निजी स्तर पर हो रही व्यवस्था, सरकारी बजट पर स्थिति स्पष्ट नहीं
अमरपुरा जागीर में
स्थापित की जा रही पेयजल सुविधाओं को लेकर यह भी चर्चा है कि इन व्यवस्थाओं में
निजी स्तर पर सहयोग किया जा रहा है। हालांकि, इन कार्यों में सरकारी बजट का उपयोग हुआ है या नहीं, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस संबंध
में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि निजी स्तर पर पहल कर ग्रामीणों को
पेयजल जैसी जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, तो यह गांव के लिए राहत की बात है। वहीं, यदि इन कार्यों में जनप्रतिनिधियों या
अन्य लोगों का सहयोग मिल रहा है, तो इससे यह भी
स्पष्ट होता है कि स्थानीय जरूरतों को समय पर पहचानकर उन पर काम करना कितना जरूरी
है।
लूणदा में पैरवी और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवाल
दूसरी ओर, लूणदा में पेयजल और रोशनी जैसी सुविधाओं
को लेकर अपेक्षित सक्रियता नजर नहीं आने से ग्रामीणों के बीच नेतृत्व और पैरवी को
लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि गांव की समस्याओं को उच्च स्तर तक
पहुंचाने और उनके समाधान के लिए प्रभावी पैरवी करने वाले लोगों की कमी के कारण
लूणदा की जरूरतों को उतनी प्राथमिकता नहीं मिल पा रही है।
ग्रामीणों की
अपेक्षा है कि चुनावी माहौल केवल प्रचार, दावेदारी और राजनीतिक समीकरणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इस दौरान गांवों की वास्तविक
समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। पेयजल, रोशनी, सड़क और अन्य
बुनियादी सुविधाएं किसी एक राजनीतिक दल या उम्मीदवार का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे गांव की जरूरत हैं।
चुनाव में विकास बनेगा चर्चा का प्रमुख मुद्दा?
पंचायतीराज चुनाव
के नजदीक आते ही गांवों में विकास कार्यों और जनसुविधाओं को लेकर चर्चाएं तेज होना
स्वाभाविक है। अमरपुरा जागीर में पेयजल और रोशनी की व्यवस्थाओं को लेकर हो रही
गतिविधियां जहां ग्रामीणों को राहत देने वाली मानी जा रही हैं, वहीं लूणदा में ऐसी सुविधाओं की कमी अब
चर्चा का विषय बनती जा रही है।
अब देखने वाली बात
यह होगी कि चुनावी सरगर्मियों के बीच लूणदा की मूलभूत समस्याओं को लेकर कौन आगे
आता है और ग्रामीणों की मांगों को जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों तक कौन
पहुंचाता है। फिलहाल, अमरपुरा जागीर में सुविधाओं को लेकर हो
रही पहल और लूणदा में अपेक्षित व्यवस्थाओं के अभाव की तुलना ने ग्रामीण राजनीति
में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
सवाल यही है—जब चुनाव गांव की चौखट तक पहुंच चुका है, तो क्या लूणदा को भी पेयजल और रोशनी जैसी
मूलभूत सुविधाओं के लिए ठोस पहल का इंतजार खत्म होगा, या ग्रामीणों की समस्याएं एक बार फिर
चुनावी वादों तक ही सीमित रह जाएंगी?





